Anurag's
Work Life

Meet Anurag Sharma, a fresh MBA graduate in Hospital Management who has just started an exciting career as an Operations Manager at a private hospital in Dehradun. Anurag’s journey from a beginner to a skilled professional is full of challenges, growth, and inspiring moments. 

Each day starts with an energetic morning routine, followed by handling various issues at the hospital, and ends with evening sessions learning Talent MD skill courses. Anurag’s daily diary captures these experiences, offering behind-the-scenes insights into hospital management, practical tips for overcoming challenges, and useful advice for improving efficiency and patient care.

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11-Jul-2024

Dehradun, India

नौवां दिन - फ्रंट ऑफिस की चुनौती और समाधान

देहरादून की सुबह हमेशा की तरह ताजगी और ऊर्जा से भरी हुई थी। जैसे ही सूरज की किरणें मेरे कमरे की खिड़की से भीतर आईं, मैंने महसूस किया कि आज का दिन कुछ खास होने वाला है। तैयार होकर, मैं अपने पीजी से अस्पताल की ओर निकल पड़ा। 

अस्पताल में आज का दिन सामान्य नहीं था। सुबह के समय ही फ्रंट ऑफिस में एक बड़ी चुनौती सामने आ गई। एक मरीज के परिवारजन, जिनके प्रियजन की मृत्यु रात में हो गई थी, अत्यधिक गुस्से में थे। उनका मानना था कि मरीज की मृत्यु अस्पताल की गलती के कारण हुई है। उनके गुस्से और दुःख को देखकर स्थिति बहुत ही नाजुक हो गई थी। जैसे ही मैंने फ्रंट ऑफिस में प्रवेश किया, वहां का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। परिवारजन चिल्ला रहे थे और कर्मचारियों के साथ बदतमीजी कर रहे थे। मैंने तुरंत स्थिति को संभालने का फैसला किया। मैं उनके पास गया और शांत स्वर में उनसे बात करने की कोशिश की। "नमस्कार, मेरा नाम अनुराग है और मैं इस अस्पताल का मैनेजर हूँ “। मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूँ और पूरी कोशिश करूंगा कि आपको सही जानकारी मिले। कृपया शांत हो जाइए और हमें इस स्थिति को सुलझाने में मदद कीजिए," मैंने कहा। मेरी बातों का उन पर थोड़ा प्रभाव पड़ा और वे कुछ शांत हो गए। मैंने उन्हें अस्पताल के एक शांत कमरे में ले जाकर बिठाया और पूरी घटना के बारे में विस्तार से पूछा। उनकी बातों को ध्यान से सुनने के बाद, मैंने संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ से तुरंत संपर्क किया और मामले की जांच शुरू की। मामले की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मरीज की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी और इसमें अस्पताल की कोई गलती नहीं थी। मैंने परिवारजन को इस बारे में जानकारी दी और उन्हें समझाने की कोशिश की कि हम सभी ने मरीज की भलाई के लिए हर संभव प्रयास किया था। "मैं समझ सकता हूँ कि आप इस समय कितने दुखी और गुस्से में हैं। हम सभी ने आपके प्रियजन की देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी। कृपया हमारी रिपोर्ट देखें और यदि आप चाहें तो हम एक स्वतंत्र जांच की भी व्यवस्था कर सकते हैं," मैंने उनसे कहा। मेरी ईमानदारी और सहानुभूति भरी बातों का असर हुआ और धीरे-धीरे उनका गुस्सा कम होने लगा। वे समझ गए कि अस्पताल ने पूरी ईमानदारी और मेहनत से काम किया था। अंततः, वे शांति से चले गए और धन्यवाद कहकर विदा ली। इस पूरे अनुभव ने मुझे यह सिखाया कि एक मैनेजर के रूप में हमें न केवल प्रशासनिक कार्यों में निपुण होना चाहिए, बल्कि हमारे पास सहानुभूति और संवाद की भी क्षमता होनी चाहिए। केवल तब ही हम असली चुनौतीपूर्ण स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाल सकते हैं। 

शाम को, इस तनावपूर्ण दिन के बाद, मैंने सोचा कि थोड़ा मानसिक शांति पाने के लिए पास के मंदिर जाने का अच्छा समय है। मैंने अपने पीजी से निकलकर देहरादून के प्रसिद्ध टपकेश्वर मंदिर का रुख किया। वहाँ पहुँचकर, मंदिर के शांत और पवित्र वातावरण में मैंने भगवान शिव के दर्शन किए और अपने मन को शांत किया। टपकेश्वर मंदिर के प्रांगण में बैठकर, मैंने आज के दिन की घटनाओं के बारे में सोचा और महसूस किया कि कैसे भगवान की कृपा और अपने आत्मविश्वास से मैंने इस चुनौतीपूर्ण दिन को सफलतापूर्वक संभाला। मंदिर की शीतल हवा और चारों ओर फैले हरियाली ने मेरे मन को शांति और संतोष से भर दिया। जब मैं अपने पीजी लौट आया, तो मेरे चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी। आज का दिन बहुत ही सीखपूर्ण और संतोषजनक रहा। मैं जानता हूँ कि हर दिन एक नई चुनौती और एक नया अनुभव लेकर आता है, और मैं हर नई सुबह के लिए तैयार हूँ। 

शुभ रात्रि! 😊 --- अनुराग शर्मा (लखनऊ से देहरादून तक, सपनों और मेहनत के साथ)

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Readers Comments

09-Jul-2024 16:26:37
Muhammad Ahsan Majeed
I like it